Chhath Puja 2022 Day 2: छठ महापर्व का दूसरा दिन आज, इस योग में करें खरना पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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Chhath Puja 2022 Day 2: दिवाली के बाद से छठ पूजा मनाई जाती है। छठ पूजा का आगाज़ कल यानी 28 अक्टूबर से हो गया था। कल यानी छठ पूजा महापर्व का पहला दिन यानी नहाय-खाय था। इस दिन व्रती महिलाएं व्रत से पहले स्नान करती हैं, जिसके बाद महिलाएं सात्विक भोजन भी ग्रहण करती हैं। वहीं आज यानी शनिवार के दिन 29 अक्टूबर को छठ महापर्व का दूसरा दिन हैं। बता दें कि आज के दिन खरना पूजा (Chhath kharna ) मनाई जाएगी, जो कि सभी लोगों के लिए बहुत खास होती हैं। आइए जानते हैं कि खरना पूजा का क्या महत्व होता है और किस मुहूर्त में पूजा करें-

खरना पूजा का शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचाग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन खरना पूजा मनाई जाती हैं। आज यानी 29 अक्टूबर को सुबह 08:13 बजे से खरना की पूजा शुरू हो गई थी। इस तिथि की समाप्ति कल यानी 30 अक्टूबर को सुबह 05:49 बजे तक होगी। बता दें कि इस दिन सूर्योदय सुबह 06:31 बजे पर हुआ था।

रवि और सुकर्मा योग में करें पूजा

छठ पूजा का दूसरे दिन यानी आज खरना पूजा का बहुत महत्व होता हैं। बता दें कि इस बार खरना पर दो योग भी बन रहे हैं। इस बार छठ महापर्व में खरना पूजा के दौरान रवि योग बन रहा है। वहीं आज यानी 29 अक्टूबर की सुबह 06:31 बजे से रवि योग का प्रारंभ हो गया था जो कि सुबह 09:06 बजे तक रहा था। वहीं सुकर्मा योग आज रात 10:23 बजे से बन रहा है।

खरना पूजा का महत्व

इस दिन खरना पूजा का सबसे ज्यादा महत्व व्रती महिला की शुद्धता के लिए होता है। इस दिन व्रती महिलाओं को मानसिक तौर पर 36 घंटे के कठिन निर्जला व्रत के लिए तैयार किया जाता हैं। महिलाओं की तन और मन की शुद्धता के बाद से ही इस व्रत की शुरुआत हो जाती है। बता दें कि खरना पूजा के दिन ही छठ पूजा का प्रसाद बनाया जाता है, जो कि शुद्धता के साथ ही बनाया जाता है। यह प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी की मदद से बनाया जाता है। वहीं प्रसाद में ठेकुआ बनाने का महत्व होता है।

विधि विधान से करें खरना पूजा

  1. छठ पूजा के दूसरे दिन सुबह स्नान के बाद व्रती महिलाएं पूजा और व्रत का संकल्प करती हैं।

2. वहीं इसके बाद इस दिन निर्जला व्रत रखा जाता है और दिन के समय में छठ पूजा का प्रसाद भी बनाया जाता है।

3. फिर रात के समय में चावल और गुड़ से खीर बनाई जाती है। इसके साथ ही पूड़ी भी बनाई जाती है।

4. प्रसाद बनने के बाद व्रती महिलाएं सूर्य भगवान को रसियाव (चावल और गुड़ से बनी खीर), मिठाई और पूड़ी का भोग लगाती हैं।

5. इसके बाद व्रती महिलाओं को सबसे पहले प्रसाद दिया जाता है। बता दें कि महिलाएं के प्रसाद खाने के बाद ही परिवार के सभी सदस्य प्रसाद को ग्रहण कर सकते हैं।

6. सभी सदस्यों के प्रसाद ग्रहण करने के बाद से व्रती महिलाएं का 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत शुरू हो जाता है. इस दौरान व्रती महिलाओं को अन्न और जल ग्रहण नहीं करना चाहिए।

7. इसके अगले दिन शाम को सर्य देवता को अर्घ्य दिया जाता है। फिर वहीं उसके अगले दिन सुबह जल्दी उठकर सूर्य देवता को अर्घ्य देकर प्रसाद ग्रहण करके पारण किया जाता है। इसी के साथ ही छठ पूजा का महापर्व संपन्न होता हैं।

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