मोहनजोदड़ाे में मिले बुद्धा पेंडेंट को किस तरह जोड़ा जा रहा सिंधु घाटी के साथ ? जबकि ये सभ्यता तो 4 हज़ार साल पुरानी है

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Mohenjo Daro

पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ संरक्षणकर्ता अली हैदर ने पुष्टि कर बताया है कि भारी बारिश के कारण एक अनोखी वास्तु सामने आई है। पाकिस्तान की एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पुरातात्विक महत्व वाली जगह के पास पड़ने वाले गांव धनाड के निवासी इरशाद अहमद को यह पेंडेंटनुमा चीज मिली थी। इरशाद एक टूरिस्ट गाइड भी हैं। उन्होंने कहा कि भारी बारिश के बाद उन्हें यह चीज मिली थी, जिसकी जानकारी उन्होंने पुरातात्विक स्थल के संरक्षक नवीद संगाह को दे दी।

बुद्ध पेंडेंट के रूप में हुई पहचान

पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के चीफ इंजीनियर रह चुके और वर्तमान में Endovement Fund Trust के प्रोजेक्ट डायरेक्टर मोहन लाल ने इस नायाब वस्तु की जांच करने के बाद प्राथमिक तौर पर इसकी पहचान बुद्ध पेंडेंट के रूप में की है। उन्होंने इसे दुर्लभ खोज बताते हुए कहा कि ये पेंडेंट मोहनजोदड़ो के गुमनाम इतिहास को आगे बढ़ाने के काम आ सकती है। हालांकि इसके लिए आगे और ज्यादा स्टडी की जरूरत पड़ सकती है।

भगवान बुद्ध से भी हजारों साल पुरानी सभ्यता है मोहनजोदड़ो

मोहनजोदड़ो (Mohenjo Daro) पाकिस्तान (Pakistan) के सिंध प्रात में कभी सिंधु नदी के किनारे बसा एक शहर हुआ करता था। इसे दुनिया की सबसे पुरानी नगरीय व्यवस्था भी कहा जाता है। हड़प्पा मोहनजोदाड़ो अब से लगभग 4000 साल पुराना शहर है, जिसकी खोज 1922 में भारतीय पुरातत्वविद् आरडी बनर्जी और उनकी टीम के द्वारा की गई थी। उस समय यह भारत का हिस्सा हुआ करता था। भगवान बुद्ध का जन्म इसके हजारों साल बाद 563 ईसा पूर्व बताया जाता है।

बीबीसी में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक मोहनजोदड़ो (Mohenjo Daro) का मतलब ‘मुर्दों का टीला’ होता है और यह सिंधु घाटी सभ्यता का एक प्रमुख शहर रहा है, जिसे योजनाबद्ध तरीके से बसाया गया था। यहां उस वक्त जरूरत की सारी सुख-सुविधाएं मिलती थीं। यहां बने घरों में पक्की ईंटों से बने शौचालय और स्नानागार भी थे। जल निकासी की व्यवस्था थी। सड़क के बीच से गुजरनेवाले नाले ईंटों से ढक कर बनाए गए थे। 618 एकड़ में फैला यह सिंधु सभ्यता (2600-1900 ईसा पूर्व) का सबसे बड़ा और सबसे अच्छा संरक्षित केंद्र माना जाता है।

4000 साल पुरानी है सिंंधु घाटी की सभ्यता 

सिंधू घाटी सभ्यता अब से लगभग 4000 साल पुरानी है और महात्मा बुद्ध का जन्म अब से 563 ईसा पूर्व बताया जाता है। ऐसे में गौतम बुद्ध को इसके साथ जोड़ने की वजह क्या है ? आपने स्कूल में पढ़ा होगा कि मोहनजोदड़ो में बौद्ध स्तूप की खुदाई के दौरान ही सिंधु घाटी सभ्यता के अवशेष पहली बार मिले थे। पूरी दुनिया के प्राच्य इतिहासकारों में इसकी चर्चा है।

सोशल मीडिया पर इसको लेकर एक बहस छिड़ी हुई है। इस बारे में कई तरह की प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं। हालांकि पुरातत्वविदों का कहना है कि इस पेंडेंट के अध्ययन के बाद ही विस्तार से कुछ कहा जा सकता है।

एक्सपर्ट ही सुलझाएंगे गुत्थी

संस्कृति विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि यह वस्तु गले में पहने जाने वाले किसी पेंडेंट की तरह प्रतीत होती है। उनका कहना है कि इस स्थान पर पेंडेंट का मिलना एक दुर्लभ खोज हो सकती है। हालांकि उन्होंने कहा कि यह कांस्य से बनी है या किसी अन्य सामग्री से, इस बारे में तो एक्सपर्ट ही बता सकते हैं। एक्सपर्ट्स ही इसका ऐतिहासिक मूल्य बता सकते हैं।

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