पृथ्वी शॉ पर इस दवा के कारण नवम्बर तक लगा बैन, कैसा होता है इसका असर ?

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भारत के युवा बल्लेबाज पृथ्वी शॉ को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने डोपिंग नियमों का उल्लंघन करने के कारण निलंबित कर दिया है. बीसीसीआई ने शॉ को 15 नवंबर तक के लिए निलंबित किया है. पृथ्वी शॉ को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की डोपिंग रोधी संहिता के उल्लंघन का दोषी पाया गया है.

पृथ्वी शॉ का बैन 16 मार्च 2019 से 15 नवंबर 2019 तक प्रभावी रहेगा. इसका मतलब है कि वह बांग्लादेश और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज में भी नहीं खेल पाएंगे. 

BCCI के मुताबिक बोर्ड के डोपिंग रोधी कार्यक्रम के तहत शॉ ने 22 फरवरी 2019 को सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के दौरान पृथ्वी शॉ ने अपना मूत्र सैम्पल दिया था. उनके सैम्पल की जांच हुई जिसमें प्रतिबंधित पदार्थ ‘टरबुटालाइन’ के अंश पाए गए थे. यह पदार्थ वाडा के प्रतिबंधित पदार्थ की सूची में शामिल है.

क्या हैं ‘वाडा’ के नियम  , किसी भी खिलाड़ी को कोई भी दवा खाने से पहले काफी सावधानी बरतनी होती है. वाडा (वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी) ने कई दवाओं को प्रतिबंधित दवाओं की श्रेणी में रखा हुआ है. अगर कोई खिलाड़ी इसका सेवन करता है तो उस पर बैन लगा दिया जाता है. पृथ्वी शॉ के केस में गनीमत यह है कि उन पर बीसीसीआई ने सिर्फ 8 महीनों का बैन लगाया है.

वाडा ने टरबुटालाइन को प्रतिबंधित किया हुआ है. किसी भी खिलाड़ी को यह दवा खाने से पहले बीसीसीआई से अनुमति लेनी पड़ती है. साथ ही इस बात के सबूत भी देने होते हैं कि उसके अलावा कोई और दवा नहीं ली जा सकती है. टरबुटालाइन का इस्तेमाल अधिकतर अस्थमा से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए होता है. पृथ्वी शॉ ने यह दवा खांसी से निजात पाने के लिए खाई थी, लेकिन मुसीबत में फंस गए.

क्यों प्रतिबंधित है टरबुटालाइन? टरबुटालाइन को वाडा ने इसलिए प्रतिबंधित दवाओं की श्रेणी में रखा है, क्योंकि इस दवा से मांसपेशियों की ताकत बढ़ जाती है. यूरोपियन रेस्पिरेटरी जर्नल ने अपनी रिपोर्ट में यह साफ किया है कि टरबुटालाइन दवा के सेवन से एनारोबिक परफॉर्मेंस बढ़ जाती है यानी व्यक्ति सामान्य स्थिति के मुकाबले बिना ऑक्सीजन के काफी देर तक रह सकता है. साथ ही, इस दवा से मांसपेशियों की ताकत भी बढ़ जाती है. दवाओं का सेवन करके कोई खेल खेलने में व्यक्ति अपनी वास्तविक क्षमता से अधिक खेल सकता है. यही कारण है कि वाडा ने इसे बैन किया है.

जानिए क्यों बेन हुए पृथ्वी शॉ

बीसीसीआई के मुताबिक, ’16 जुलाई 2019 को शॉ को बीसीसीआई के डोपिंग रोधी नियमों (एडीआर) के अनुच्छेद 2.1 के अंतर्गत डोपिंग रोधी नियम उल्लंघन (एडीआरवी) का दोषी पाया गया और उन्हें आरोप की जांच होने तक अस्थायी रूप से प्रतिबंधित किया गया. शॉ ने अपने ऊपर लगे आरोपों को माना लेकिन कहा कि उन्होंने अनजाने में इस पदार्थ का सेवन किया, चूंकि उन्हें खांसी थी और इसके लिए उन्होंने जो दवाई ली थी उसमें प्रतिबंधित पदार्थ के अंश थे जिससे वो अनजान थे.’

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