मोहब्बत जो डरती हो, वो मोहब्बत नहीं अय्याशी है…गुनाह है, जानें सैंडविच स्टॉल से लेकर बॉलवुड तक की कहानी

सांताक्रूज़ मुंबई के जुहू क़ब्रिस्तान में शाम 5 बजे उनके शव को दफ़नाया जाने वाला है। 8 दिनों से ICU में भर्ती थे।

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Dilip Kumar Biography
सांताक्रूज़ मुंबई के जुहू क़ब्रिस्तान में शाम 5 बजे उनके शव को दफ़नाया जाने वाला है। 8 दिनों से ICU में भर्ती थे।

Mumbai: अभिनेता दिलीप कुमार (Dilip Kumar Biography) का 98 साल की उम्र में निधन हो गया। दिलीप 8 दिनों से हिंदूजा अस्पतला के ICU में भर्ती थे और कई दिनों से बीमार चल रहे थे। बता दें सांताक्रूज़ मुंबई के जुहू क़ब्रिस्तान में शाम 5 बजे उनके शव को दफ़नाया जाने वाला है। इस दौरान कई सुपर स्टार दिलीप कुमार के अंतिम संस्कार के लिए मौजूद रहेंगे। 

अभिनेता दिलीप कुमार का निधन, 8 दिनों से ICU में थे भर्ती

बॉलीवुड में एंट्री से पहले क्या करते थे दिलीप कुमार

मोहम्मद यूसुफ खान (Mohammad Yusuf Khan) का जन्म 11 दिसंबर 1922 में हुआ था। वे पेशावर के थे, लेकिन बाद में उनके पिता मुंबई में रहने लगे थे। 1940 में दिलीप का पिता से विवाद हो गया था। जिसके बाद दिलीप कुमार ने पुणे छोड़ दिया और एक पारसी कैफे मालिक के यहां कैंटीन में काम करने लगे। दिलीप कुमार को बचपन से ही अच्छा बोलना और लिखना आता था। साथ ही उन्हें अग्रेजी की भी अच्छी समझ थी। जिसकी वजह से उन्हें ये नौकरी मिली थी। इस बीच
दिलीप ने आर्मी क्लब में एक सैंडविच स्टॉल शुरु किया और रुपये बचाकर मुंबई चले गए। 

 

बॉलीवुड में एंट्री की बात की जाए तो 1944 में फिल्म ज्वार भाटा से शुरुआत की थी। 1949 में बनी फिल्म अंदाज़ में सफलता मिलने के बाद दिदार, देवदास जैसी फिल्मों में काम किया। 1960 में मुगले-ए-आज़म फिल्म से दिलीप को पहचान मिलने लगी। ये फिल्म पहली बार ब्लैक एंड वाइट में बनी थी, इसके बाद 2004 में रंगीन में भी बनाई गई। 1970, 1980 और 1990 के दशक में उन्होने कम फिल्मों में काम किया। 1998 में बनी फिल्म किला उनकी आखरी फिल्म थी।

 

1980 में उन्हें (Dilip Kumar Biography) मुंबई का ‘शेरिफ’ घोषित किया गया और सम्मानित भी किया गया। 1991 में उन्हें पद्म भूषण 1995 में उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साल 2015 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। साल 2000 से 2006 तक दिलीप कुमार राज्यसभा में सांसद के तौर पर रहे।

मोहम्मद यूसुफ खान से कैसे बने दिलीप कुमार

दिलीप कुमार (Dilip Kumar Death) को स्क्रीन पर काम करने का मौका देने वाली बॉम्बे टॉकीज की ऑनर देविका रानी थीं। जब फिल्म में मौका मिला तो रिलीज के पहले एक बार देविका ने उन्हें अपने केबिन में बुलाया था। और कहा था कि यूसुफ मैं तुम्हें जल्द से जल्द एक्टर के तौर पर लॉन्च करना चाहती हूं, लेकिन मेरे ख्याल से दिलीप कुमार एक अच्छा नाम है। तुम्हें ये नाम कैसा लग रहा है। इसके बाद से मोहम्मद यूसुफ खान का नाम बदलकर दिलीप कुमार रख दिया गया। 

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दिलीप कुमार ने की थी दो शादियां

बॉलीवुड के ‘द मोस्ट एलिजिबल बैचलर’ रहे दिलीप कुमार और सायरा बानू की शादी काफी चर्चा में रही थी। 1966 में सायरा बानो (Saira Banu) के साथ शादी के बंधन में बंधे थे। सायरा 22 साल की थी तो वहीं दिलीप कुमार 44 साल के थे। एक वक्त ऐसा आया था जब दोनों के रिश्तों में दरार आ गई थी। 

1980 में दिलीप कुमार ने हैदराबाद की रहने वाली तलाकशुदा महिला आसमां रहमान (Asma Rehman) से दूसरी शादी कर ली थी। आसमां के पहले से ही बच्चे थे। दिलीप को लगता था कि आसमां अपने पहले पति के साथ मिलकर उन्हें धोखा दे रहीं हैं और मीडिया में उनके सारे राज खोल रहीं हैं। इसके बाद दिलीप को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने 1983 में आसमां को तलाक दे दिया और दोबारा सायरा के पास आ गए। अहम बात ये है कि दिलीप और सायरा बानो के बच्चे नहीं है, लेकिन आसमां रहमान के पहले से ही 3 बच्चे थे। 

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