रविवार को लगेगा साल का तीसरा चंद्र ग्रहण

यह एक उपछाया ग्रहण है, जिसमें सूतक काल मान्य नहीं होता है. आमतौर पर किसी भी ग्रहण के शुरू होने से 12 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है.

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Chandra Grahan 2020

Delhi: रविवार यानी 5 जुलाई को एक बार फिर चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2020) लगने जा रह है. गुरु पूर्णिमा के दिन लगने वाला यह ग्रहण (Chandra Grahan) साल का तीसरा चंद्रग्रहण है. ये चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) सुबह 8 बजकर 38 मिनट से शुरू होगा और सुबह 11 बजकर 21 मिनट पर समाप्त होगा. चंद्र ग्रहण की अवधि 2 घंटे 43 मिनट होगी. यह एक उपछाया ग्रहण है, जिसमें सूतक काल मान्य नहीं होता है. आमतौर पर किसी भी ग्रहण के शुरू होने से 12 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है.

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यह ग्रहण (Chandra Grahan 2020) दक्षिण एशिया के कुछ हिस्से, अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में दिखाई देगा. आपको बता दें कि वर्ष 2020 में कुल 6 ग्रहण लगेंगे. इसमें से दो चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) (10 जनवरी, 5 जून) व एक सूर्यग्रहण (21 जून) लग चुका है. आगामी समय में दो चंद्र ग्रहण व एक सूर्य ग्रहण और लगेगा. 5 जुलाई को लगने वाले इस चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) में सूतक काल मान्य नहीं होगा यानि किसी भी प्रकार के शुभ कार्य वर्जित नहीं होंगे. पूजा पाठ और भोजन से जुड़े कार्य किए जा सकेंगे. लेकिन फिर भी संयम बरतने और नियमों का पालन करना जरूरी है. 5 जुलाई को लगने वाला चंद्र ग्रहण उपछाया चंद्र ग्रहण है, यह भारत में दिखाई नहीं देगा.

पौराणिक कथा के अनुसार
हिंदू धर्म में चंद्रग्रहण के पीछे राहु केतु होते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान देवताओं और दानवों के बीच अमृत पाने को लेकर युद्ध चल रहा था. अमृत को देवताओं को पिलाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी नाम की सुंदर कन्या का रूप धारण किया और सभी में अमृत बराबर बांटने के लिए राजी कर लिया. जब मोहिनी का रूप लिए भगवान विष्णु अमृत को लेकर देवताओं के पास पहुंचे और उन्हें पिलाने लगे तो राहु नामक असुर भी देवताओं के बीच जाकर बैठ गया जिससे अमृत उसे भी मिल जाए.

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जैसे ही वो अमृत पीकर हटा, भगवान सूर्य और चंद्रमा को इस बात की भनक हो गई कि वह असुर है और ये बात उन्होंने भगवान विष्णु को बता दी. विष्णु जी ने अपने सुदर्शन चक्र से उसकी गर्दन धड़ से अलग कर दी लेकिन वह अमृत पी चुका था इसीलिए वह मरा नहीं. उसका सिर और धड़ राहु और केतु नाम से जाना गया. ऐसी मान्यता है कि इसी घटना के कारण राहु केतु सूर्य और चंद्रमा को ग्रहण लगाते हैं.

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