Seafood: सीफूड लवर्स के लिए सजेगा मंच, जान सकेंगे किन-जीवों को खाया जाता है ?

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समुद्र में लाखों तरह के जीव पाए जाते हैं। कुछ लोग बड़े चाव से सीफूड (Seafood) खाना पसंद करते हैं। उनमें कुछ जीव ऐसे होते हैं जो खाने योग्य नहीं होते हैं। आपको जानना है कि कौन से जीव खाए जाते हैं और कौन से जीवों से कारोबार किया जाता है तो आपको हमारी इस पोस्ट पर ध्यान देना होगा। हम आपको देंगे इसकी जानकारी। ये आपके लिए एक अच्छी खबर हो सकती है अगर आप रूचि रखते हैं। आपको बता दें कि भारत सरकार की तरफ से अगले साल 15 से 17 फरवरी तक कोलकाता (Kolkata) में 23वें इंडिया इंटरनेशनल सीफूड शो का आयोजन किया जाएगा।

कौन-कौन हैं आयोजक

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत एक संगठन काम करता है, जो सीफूड के मामलों की देख-रेख करता है। इस संगठन का नाम समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) है। इसके साथ ही देश में सीफूड का निर्यात करने वालों का भी एक संगठन है, जिसका नाम सीफूड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEAI) है। ये दोनों संगठन मिलकर भारत का 23वां इंडिया इंटरनेशनल सीफूड शो को आयोजित करने जा रहे हैं।

कई देशों से आएँगे खरीददार

इंडिया इंटरनेशनल सीफूड शो एक तरह से पूरी दुनिया में भारत से समुद्री जीवों के निर्यात बढ़ाने के लिए आयोजित किया जाता है। एमपीईडीए के अध्यक्ष डॉक्टर के. एन. राघवन के मुताबिक समुद्री खाद्य पदार्थ के क्षेत्र में तरक्की तो देखने को मिलेगी ही साथ ही दुनियाभर से सीफूड (Seafood) के खरीददार भी आएंगे। इस तरह से विदेश और भारत के बीच बातचीत भी अच्छी होगी। सीफूड के क्षेत्र में काम करने वाले उद्यमियों को इस क्षेत्र की लेटेस्ट टेक्नोलॉजी देखने का भी मौका मिलेगा। इस मंच के जरिये वे लोग सीधे लेटेस्ट मशीनरी के मैन्यूफैक्चरर और सप्लायर्स से भी मिल सकते हैं।

निर्यात में बढ़ रहा सीफूड

वर्ष 2021-22 के दौरान भारत से 7.76 बिलियन डॉलर के सीफूड (Seafood) का निर्यात हुआ है। मात्रा की बात की जाए तो इस वर्ष 13,69,264 टन समुद्री उत्पादों का निर्यात किया गया। इसके अलावा इस साल श्रिम्प या झींगा मछली का उत्पादन भी एक मिलियन टन को पार कर गया। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि एक बहुआयामी कार्यनीति के तहत जिस तरह से कैप्चर फिशरीज और एक्वाकल्चर या जलकृषि को बढ़ावा दिया जा रहा है, अब वह दिन दूर नहीं है जब हमारा निर्यात अगले पांच वर्षों में 15 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।

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