EWS Reservation SC Decision: SC ने आरक्षण को दिखाई हरी झंडी, जानिए पात्रों को किस तरह से मिलेगा लाभ  

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EWS Reservation SC Decision: देश की सर्वोच्च अदालत ने EWS को सही ठहाराया है। सर्वोच्च अदालत का कहना है कि यह आरक्षण संविधान के मूलभूत सिद्धांतों और भावना का उल्लंघन नहीं करता है। EWS आरक्षण के 10 फीसदी कोटे का पात्रों को लाभ मिलेगा।

बता दे कि, जनवरी 2019 में नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) ने 103वें संविधान संशोधन के तहत EWS कोटा लागू किया था। सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 के खंड 6 में इस कोटे को जोड़ा जो नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण देता है।

नौकरियों में मिलेगी छूट

इसके तहत राज्य सरकार शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण और नौकरी पर आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग (EWS) को 10 फीसदी आरक्षण दे सकती है। साथ ही अनुच्छेद 30 (1) के तहत आने वाले अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को छोड़कर किसी भी शैक्षणिक संस्थान (प्राइवेट) में भी इस तरह का आरक्षण दिया जा सकता है।

आपको बता दे कि, EWS का अर्थ है- आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण। यह आरक्षण सिर्फ जनरल कैटेगरी यानी सामान्य वर्ग के लोगों के लिए है। अन्य श्रेणी के वर्गों जैसे ओबीसी (27 फीसदी), एससी (15फीसदी), और एसटी (7.5फीसदी) आरक्षण पहले से है।

EWS आरक्षण का फैसला आपके और आपके परिवार की वार्षिक आय पर निर्भर करता है। इस आरक्षण का फायदा लेने के लिए परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। इसमें स्रोतों में सिर्फ सैलरी ही नहीं, कृषि, व्यवसाय और अन्य पेशे से मिलने वाली आय भी शामिल हैं।

5 एकड़ से कम होनी जमीन

आपको ये भी बता दे कि, EWS आरक्षण के तहत व्यक्ति के पास 5 एकड़ से कम कृषि भूमि होनी जरूरी है। इसके अलावा 200 वर्ग मीटर से अधिक का आवासीय फ्लैट नहीं होना चाहिए। यहां यह गौर करने वाली बात है कि 200 वर्ग मीटर से ज्यादा भूमि का आवासीय फ्लैट नगर पालिका के अंतर्गत भी नहीं होना चाहिए।

आपको बताते चले कि, EWS आरक्षण का लाभ लेने के लिए पात्र के पास ‘आय और संपत्ति प्रमाण पत्र’ होना जरूरी है। यह प्रमाण पत्र तहसीलदार या उससे ऊपर पद के राजपत्रित अधिकारी ही जारी करते हैं। इस प्रमाण पत्र की वैधता एक साल रहती है। जिसे अगले वर्ष फिर से रीन्यू करना होता है।

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