आजादी में मुस्लिमों का बड़ा योगदान, वह नहीं हैं विभाजन के लिए जिम्मेदार: Asaduddin Owaisi

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Asaduddin Owaisi

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने शुक्रवार को एक जनसभा को संबोधन किया जिसमे उन्होने, ‘भारत की आज़ादी में मुस्लमानों के योगदान को याद किया. भारत की आज़ादी में हमारे मजहब के लोगों का भी बड़ा योगदान है. जिसे भुला नही जा सकता. हम सिराजुद्दौला (Siraj-ud-Daulah) और टीपू सुल्तान (Tipu Sultan) की कुर्बानी को नही भूल सकते.

असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने शुक्रवार को एक जनसभा को संबोधित किया. इस बीच Asaduddin Owaisi ने आजादी में मुसलमानों की भूमिका को याद किया. और कहा कि 1947 में हमने आजादी प्राप्त करी. हालांकि इससे पहले भी कई आंदोलन हुए, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जान गंवाईं. और उन्हे भूला नही जा सकता हैं. AIMIM प्रमुख ने कहा कि 1857 में भी क्रांति हुई थी.

भारत की आज़ादी में हमारे मजहब के लोगों का भी बड़ा योगदान है. जिसे भुला नही जा सकता. हम सिराजुद्दौला (Siraj-ud-Daulah) और टीपू सुल्तान (Tipu Sultan) की कुर्बानी को नही भूल सकते.

हैदराबाद के मक्का मस्जिद के इमाम भी अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा हो गए थे. मौलवी अलाउद्दीन ने उनके खिलाफ मोर्चा निकाला था. उनको गोली भी लगी थी. घायल भी हुए थे. फिर उनको काला पानी की सजा काटने के लिए भेज दिया गया.

 पहले जानें इतिहास

 ‘कालापानी की सजा काटने वाला पहला व्यक्ति भी हैदाराबाद का था. करीब 30 साल कालापानी की सजा काटने के बाद वहीं उनका निधन हो गया. तुर्रेबाज खान को भी कालापानी की सजा काटने के लिए भेजा गया था. हालांकि वह वहां से भाग निकले थे. उनको पकड़कर मारकर कई दिनों तक लटका दिया गया था. मौज खान  जो अंग्रेजों के खिलाफ लड़े थे. जो पिछले 70 सालों से मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाते आ रहे हैं. उनके लिए इतिहास को अच्छी तरह जानना बेहद जरूरी है.’

मुसलमान नहीं बंटवारे के जिम्मेदार

असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने कहा जब ग्वालियर के सिंधिया झांसी की रानी और अंग्रेजों के साथ लड़ाई लड़ने आए थे. उस वक्त झांसी की रानी के साथ जो महिला थी, वो भी मुसलमान ही थी. उन्होने भी झांसी की रानी के साथ अपनी जान कि बाज़ी लगा दी थी. कई आलोचक कहते हैं नफरत कि देश के बंटवारे के लिए मुसलमान जिम्मेदार हैं  परंतु सच्चाई यह हैं कि कोई विभाजन का जिम्मेदार नहीं है.जिनको पाकिस्तान से प्यार था. वे पाकिस्तान चले गए और जिनको भारत से प्यार है, वह अभी भी यहीं रहते हैं.

मुस्लिमों को नहीं था मत का अधिकार

ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने कहा, मुसलमान विभाजन के लिए जिम्मेदार नहीं थे. नफरत करने वाले कहते हैं कि सारी रिजर्व सीटें मुस्लिम लीग ने जीती थी, लेकिन 1945/46  में अधिकतर मुसलमानों को वोट डालने का हक तक नहीं था. उन्होनें गोडसे से मोहब्बत करने वालों से यह सवाल किया कि भटकमियां अंसारी कौन थे?

अंग्रेज ने भटकमियां को महात्मा गांधी के खाने में जहर मिलाने को कहा था, लेकिन उन्होंने यह करने से इंकार कर दिया था. और गोडसे ने उन्हें गोली मार उन्हे मौत के घाट उतार डाला. अब बताओ कौन ज्यादा वफादार हैं हिंदू या मुसलमान?

‘जय हिंद’ का नारा दिया था आबेद हसन ने

‘पहला पत्रकार जिनको अंग्रेजों ने मार गिराया, वह मुसलमान थे. महात्मा गांधी को जिन्होंने आजादी की लड़ाई के अपना सारा पैसा दिया वह भी एक मुसलमान उमर सुबानी थे. मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने वालों को अल्लाबख्श के बारे में मालूम तक नही होगा. अल्लाबख्श ने जिन्ना का जमकर विरोध किया था. बाद में अल्लाबख्श के खिलाफ़ सावरकर और जिन्ना एक हो गए.

सावरकर की हिन्दू महासभा और जिन्ना की मुस्लिम लीग ने मिलकर सरकार बनाई. अंग्रेजों के खिलाफ क्विट इंडिया मूवमेंट में हैदाराबाद के आबेद हसन ने हिस्सा लिया था. जय हिंद का नारा न तो सावरकर ने दिया और न ही गोडसे ने. ‘जय हिंद’ का नारा भी आबेद हसन ने दिया था जोकि एक मुसलमान थे. मौलाना आज़ाद, खान अब्दुल गफ्फार खान, जिन्ना विभाजन के खिलाफ थे, जिसके चलते मुस्लिम लीग ने उनपर हमला कराया था.

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