कांटों के ताज से शुरू हुआ उद्धव राज, इन चीजों ने सत्ता तक पहुंचाने में निभाया रोल

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र ही नहीं पूरे राष्ट्र की निगाह में हैं। उनकी भी जो उन्हें पसंद करते हैं और सफल देखना चाहते हैं और उनकी भी जो उन्हें नाकाम होते हुए देखना चाहते हैं।

0
110
Shiv Sena chief Uddhav Thackeray

कांटों के ताज से शुरू हुआ उद्धव राज

अमर आनंद, वरिष्ठ पत्रकार

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र ही नहीं पूरे राष्ट्र की निगाह में हैं। उनकी भी जो उन्हें पसंद करते हैं और सफल देखना चाहते हैं और उनकी भी जो उन्हें नाकाम होते हुए देखना चाहते हैं। जो भी हो तमाम किन्तुओं- परन्तुओं के बावजूद संविधान की शपथ लेकर सत्ता पर काबिज हुआ ठाकरे परिवार का ये सदस्य अपनी मातृभूमि को नमन करते हुए अग्निपथ के लिये तैयार है।

तेवर और अंदाज़ के हिसाब से ठाकरे परिवार के राजनीतिक विरासत के असली हकदार समझे जाने वाले राज ठाकरे के हाथ मे राज की लकीरें पहले ही मिट चुकी थी, तो ठाकरे परिवार की तीसरी पीढ़ी का ‘आदित्योदय’ के आसार खुद उद्धव के चाहने पर भी नहीं बन पाए। ज़ाहिर है सत्ता की तस्वीर के फ्रेम में फोटोग्राफर उद्धव ठाकरे ही आये।

पिता की तुलना में नरम मिजाज और कम आक्रामक माने जाने वाले उद्धव की मेहनत,  ज़िद और समझदारी ने उन लोगो के सहयोग से उन्हें सत्ता तक पहुंचाया जिसके ख़िलाफ़ उनकी पार्टी ने चुनाव लड़ा था।  देखा जाए तो एक तरह से मिलकर चुनाव लड़ने और जीतने वाले देवेंद्र फड़नवीस की जल्दबाजी और अजीत पवार की पैंतरेबाज़ी ने भी उद्धव को सत्ता तक पहुंचाने में अपना अहम रोल निभाया है, मगर आगे जो होने वाला है वह उद्धव के रोल पर निर्भर है।

कांग्रेस के हाथ मे लगी एनसीपी की घड़ी के मुताबिक उद्धव का समय अब शुरू हो मगर इसे निभाना और अपने मुताबिक बनाये रखने की कारीगरी भी कभी चुनाव न लड़ने  और सिर्फ पार्टी सम्भालने वाले उद्धव की सीखनी होगी। महा विकास अघाड़ी के नेता उद्धव को न सिर्फ उन्हें सीएम बनाने में अहम रोल निभाने वाले एनसीपी चीफ शरद पवार को साधे रखना होगा बल्कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी अपने तेवर से नाराज़ नहीं करना होगा।

अघाड़ी सरकार में शामिल दलों के मन मिज़ाज़ के हिसाब से देखें उद्धव की पार्टी और उनका भगवा रंग उतना ही असर रख पायेगा, जितना कांग्रेस और एनसीपी के झंडों में नज़र आने वाले तीन रगों में से एक रंग। ज़ाहिर उद्धव को कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के साथ ही चलना पड़ेगा और उन साथियों को साथ लेकर भी जो वैचारिक रूप से नही बल्कि रणनीतिक रूप से उनके साथ आये हैं।

कार्यकर्ताओं और जनता की उम्मीदों और भावनाओं के हिसाब से देखें तो किसानों के मुद्दे, लघु उद्योग धंधे, मंझोले कारोबारियों की  मुश्किलें और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर राहत देने वाले कदम  उठाने के साथ ही सरकार की साख बननी शुरू होगी।

शिवाजी की सेना यानी शिव सेना के मुखिया उद्धव ने कुर्सी पर पहुंच कट जिस तरह असम्भव को संभव कर दिखाया है, उसी तरह उन्हें अब कुर्सी को सम्भाले रखने की चुनौती भी उनके सामने है और उम्मीद की जानी चाहिए कि कांटों के ताज के बावजूद वह हर हाल में एक कामयाब सीएम बनेंगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here