वकालत के पेशे में आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की घुसपैठ से इनकार नहीं!

0
160

हरेश कुमार, युवा पत्रकार ।।

आप सही हैं तो राहगीरों को क्यो मार रहें हैं, फोटोग्राफरों की पिटाई क्यों की? सीसीटीवी कैमरे को क्यों तोड़ा? यह सब बताने के लिए काफी है कि वकालत के पेशे में आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की भरमार हो चुकी है। ऐसे लोग अपने खिलाफ किसी कार्रवाई को कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं। आज इन्होंने पुलिस को पीटा है, क्योंकि कोर्ट में इनकी संख्या ज्यादा थी, लेकिन यही पुलिस बाहर खींच कर मारेगा तो कौन बचाएगा, तब कोई राहगीर भी ऐसे वकीलों को नहीं बचाएगा, क्योंकि इन्होंने निर्दोष राहगीरों तक को नहीं छोड़ा, जिसे इस घटना से कोई मतलब नहीं। उसे भी वकीलों ने अपना रौब झाड़ने के लिए खींचकर मारा है, कपड़े फाड़े हैं। आपने कोई अच्छा काम तो किया नहीं कि आपका कोई डिफेंड करें। पुलिस ने अगर गोलियां चलाई हैं या बल का गलत प्रयोग किया है, तो उसको सजा दी जाती, लेकिन आपका कार्य भी तो सही नहीं।

यह पुलिस ही है जो अपराधियों को पकड़ कर लाती है, पुलिस के कारण ही आप अपने घरों में चैन से सोते हैं। ऐसा नहीं है कि सारे पुलिसवाले दूध के धुले हैं और सारे वकील ही आपराधिक कार्यों में लिप्त हैं। पुलिस का एक बड़ा वर्ग भी अपराधियों के साथ मिला हुआ है। उनके साथ उठक-बैठक ही नहीं, उनके हर कुकर्मों में बराबर के सहयोगी हैं, इन सबके कारण ही पुलिसकर्मियों की यह दशा है कि कोई पुलिस पर फब्ती कसता या मारपीट करता है तो आम जनता बचाने नहीं आने वाली।

पुलिस-प्रशासन और वकीलों की मिलीभगत के कारण ही आपराधिक और जघन्यतम कार्यों जैसे हत्या, बलात्कार, मानव तस्करी आदि कार्य और भ्रष्टाचार में लिप्त लोग सबूतों के अभाव में पाक साफ बचकर निकल जाते हैं। नेताओं का एक बड़ा वर्ग आपराधिक और भ्रष्टाचार में लिप्त होने के कारण इन्हीं सबकी कृपा से बच निकलता है, इस कारण ही समाज में गलत संदेश जाता है। वैसे भी न्याय की देवी की आंखों पर पट्टी चढ़ी होती है, उसे बगैर सबूतों के कुछ दिखता नहीं और आपराधिक प्रवृत्ति के लोग पुलिस-प्रशासन और वकीलों से मिलकर सबूतों को नष्ट करने में माहिर हो चुके हैं।

पुलिसकर्मियों को भी अपने गिरेबान में झांकने की जरूरत है। ठीक उसी तरह से वकालत के पेशे में घुसे आपराधिक प्रवृत्ति के वकीलों को भी बाहर करना होगा, वरना वो दिन दूर नहीं, जब जनता की आपसे सहानुभूति जाती रहेगी। आज तो पुलिसकर्मी आपसे भिड़े हैं, कल होकर जनता आपके खिलाफ आएगी।

दोनों ही पक्षों को मिल बैठकर मामले को सुलझाना चाहिए, लेकिन जैसा कि लग रहा है बार काउंसिल के चुनाव को नजदीक में देखते हुए वकालत के पेशे में घुसे आपराधिक प्रवृत्ति के वकीलों ने मामले को सुलझाने की जगह और उलझा दिया है।

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here