पति ज़िंदा है लेकिन फिर भी यहाँ की सुहागनें रहती हैं विधवा बन कर

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gachwaha community
पति ज़िंदा है लेकिन फिर भी यहाँ की सुहागनें रहती हैं विधवा बन कर

Uttar Pradesh. हिन्दू (Hindu Religion) धर्म में शादी शुदा महिलाओं के लिए उसका सुहाग बहुत मायने रखता है उसके लिए जैसे उसका सिन्दूर, बिंदी, महावर मेहँदी जैसी चीज़े एक सुहागिन महिला के सुहाग का प्रतीक है। लकिन उत्तर प्रदेश में एक ऐसा समुदायें है जहा की औरतें कुछ ऐसे रहती है।

यही सुहागने अपने पति की लंबी उम्र के लिए ही सोलह श्रृंगार करती है व्रत रखती हैं लेकिन एक समुदाय ऐसा भी है जहां की महिलाएं पति के जीवित होते हुए भी हर साल कुछ समय के लिए विधवाओं (Widow) की तरह रहती हैं। इस समुदाय का नाम है ‘गछवाहा समुदाय (Gachwaha community)’। इस समुदाय की महिलाएं लंबे समय से इस रिवाज का निर्वाह करती आ रही हैं। बताया जाता है कि यहां की महिलाएं अपनी पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए हर साल विधवाओं की तरह रहती हैं। इस रिवाज के पीछे की मान्यता।

ताड़ी उतारने का काम करते हैं पति

गछवाहा समुदाय (Gachwaha community) के लोग मुख्यतः पूर्वी उत्तर प्रदेश में रहते हैं। यहां के आदमी लगभग पांच माह तक पेड़ों से ताड़ी उतारने (एक तरह का पेय पदार्थ) का काम करते हैं। इस दौरान जिन महिलाओं के पति पेड़ से ताड़ी उतारने जाते हैं वे महिलाएं विधवाओं की तरह रहती हैं। वे न ही सिंदूर लगाती हैं, न बिंदी, महिलाएं किसी भी तरह का कोई श्रंगार नहीं करती हैं। यहां तक कि वे उदास भी रहती हैं।

कुलदेवी को अर्पित करती हैं श्रंगार 

गछवाहा समुदाय (Gachwaha community) में तरकुलहा देवी को कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है। जिस दौरान पुरुष ताड़ी उतारने का काम करते हैं तो उनकी पत्नियां अपना सारा श्रंगार देवी के मंदिर में रख देती हैं। दरअसल जिन पेड़ों (ताड़ के पेड़) से ताड़ी उतारी जाती है वे बहुत ही ऊंचे होते हैं और जरा सी भी चूक व्यक्ति की मौत की वजह बन सकती है, इसलिए यहां की महिलाएं कुलदेवी से अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं और श्रंगार को उनके मंदिर में रख देती हैं।

 

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