क्या सच में आदमी 500 वर्षों तक जी सकता है, अगर ऐसा हुआ तो फिर से लिखा जाएगा इतिहास 

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Ancient Human

Ancient Human Longevity: हमें फिर से इतिहास लिखना होगा यदि यह सिद्ध हो जाता है कि प्राचीन समय में लोग 500 वर्षों तक जीवित रहते थे। वर्तमान समय को देखा जाए तो इंसान की अधिकतम आयु 100 वर्षों तक हो सकती है। वह भी कुछ लोगों की। प्रकृति के अनुसार इंसान की आयु 125 वर्ष तक हो सकती है। ऐसा एक उदाहरण देखने को भी मिला है जिसमें फ्रांस की एक महिला जीन कालमेंट जो कि 122 वर्षों तक जिन्दा रही थीं। भारत में भी ऐसे लोग अभी भी मौजूद हैं जिनकी उम्र 100 वर्षों से अधिक है।

सन्यासी स्वामी शिवानंद जिनकी उम्र 120 वर्ष है और वे अभी स्वस्थ्य हैं। वहीं देवहरा बाबा के बारे में भी दावा किया जाता है कि वे 750 साल तक जीवित रहे थे। उनकी मृत्यु 1990 के दौरान हुई थी। त्रैलंग स्वामी जिन्हें गणपति सरस्वती के नाम से भी जाना जाता है उनकी भी आयु 286 वर्ष की थी। इसी तरह कई महापुरुष इस भारत की सरजमीं पर जन्मे जिनकी उम्र काफी लम्बी हुई है।

ग्रंथों में मिलते है सबूत

आयुर्वेद शास्त्रों के अनुसार इंसान की आयु 120 बताई गई है। यदि मनुष्य के अंदर और जीने की इच्छा शक्ति है तो वो अपने योगबल के आधार पर 150 वर्ष तक जी सकता है। ऐसा कहा जाता है कि प्राचीन समय में इंसान की आयु 300 से 400 वर्ष होती थी। उस समय में इतनी लम्बी आयु का राज उस समय का वातावरण बताया जाता है। पौराणिक गाथाओं एक अनुसार आज भी हज़ारों वर्षों से कई ऋषि-मुनि जीवित हैं जो हिमालय की पहाड़ियों में छिपे हुए हैं।

हिन्दू पुराणों के अनुसार कई पौराणिक ग्रंथों (Mythological Texts) में उल्लेखित है कि अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान समेत कई ऐसे महापुरुष हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि वह आज भी जीवित हैं। रामायण काल के परशुराम और जामवंत का उल्लेख महाभारत में मिलता है।

बाइबिल में भी दिया है सबूत

ईसाईयों धर्म की पवित्र पुस्तक बाइबिल के अनुसार आदम 930 वर्ष, शेत 912 साल और मतूशेलह 969 साल तक जीवित रहे थे। मतूशेलह के 1000 साल जीने में सिर्फ 31साल ही रह गए थे। इसी तरह नूह की आयु 950 वर्ष थी। आपको बात दें कि नूह और वैयस्वत मनु की कहानी भी एक जैसी है।

इस सभी वेद-पुराणों और पवित्र पुस्तकों के हिसाब से देखा जाए तो आदमी की आयु 500 वर्ष हो सकती है। इस हिसाब से हम अंदाज़ा लगा सकते हैं कि मनुष्य की आयु इतनी अधिक होने पर वह क्या-क्या करता होगा और उसके भी अपने नियम होंगे। आज से समय में इस दुनिया में ऐसा संभव नहीं है क्योंकि वातावरण पूरी तरह बदल चुका है। पर्यावरण इतना दूषित हो चुका है कि दीर्घायु तो दूर की बात हर 10 में से एक व्यक्ति को साँस लेने में कोई न कोई दिक्कत है।

समाज में अपनी एक अलग पहचान रखता होगा। उसके द्वारा बिताए गए जीवन के बारे में हम सिर्फ मात्र एक कल्पना कर सकते हैं। पुराने ज़माने में मनुष्य ने जब इतना लम्बा जीवन जिया होगा तभी उसने धर्म-जाति और संस्कृति का विस्तार और ज्ञान-विज्ञान की खोज की होगी।

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