छठे चरण में 59 सीटों पर वोटिंग शुरू, फूलपुर-आजमगढ़ के दंगल पर नजर

0
157

उत्तर प्रदेश में छठा चरण काफी महत्वपूर्ण रहेगा। पश्चिमी से शुरू हुई सियासी बयार अब पूर्वांचल तक पहुंच गई है। 12 मई को छठा चरण समाप्त होते ही यूपी में 67 सीटों पर मतदान सम्पन्न हो जाएगा।इसके बाद मात्र 13 सीटों पर चुनाव रह जाएगा। सभी दलों के ‘लड़ाके’ तय हो चुके हैं। इस चरण में सबसे बड़ी चुनौती भाजपा के लिए है। 12 मई को जिन 14 सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें से आजमगढ़ को छोड़ बाकी सभी पर भाजपा और उसके गठबंधन का कब्जा है। इस बार सपा-बसपा के साथ आने से भाजपा के लिए मुकाबला इतना आसान नहीं दिख रहा है। उधर, बकौल कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा उनकी पार्टी जीत के लिए कम भाजपा को हराने के लिए वोटकटुआ बनने को बेताब है।

बात जातीय गणित की कि जाए तो कुछ एक सीटें छोड़ दी जाएं तो ज्यादातर पर जातीय समीकरण हावी हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बार का चुनाव जातीय गणित या फिर मोदी फैक्टर में से किस पर लड़ा जाएगा। बात संसदीय क्षेत्रवार करें। अबकी से कांगे्रस की तरफ से पूर्वांचल की लोकसभा सीटों की जिम्मेदारी प्रियंका वाड्रा संभाले हुए हैं। उनकी भी हैसियत पता चल जाएगी। यहां पूर्चांचल की ही वाराणसी की सीट से मोदी चुनाव लड़ रहे हैं जिस पर मतदान भले अंतिम चरण में होना है, लेकिन मोदी के कारण भाजपा का जोश यहां हाई है।

 

1.फूलपुर संसदीय सीट (कुल वोटरः19,75,219) देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की कर्मभूमि फूलपुर से 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के चलते पहली बार भाजपा ने खाता खोला था। हालांकि मार्च 2018 में हुए उप-चुनाव में बसपा के समर्थन से सपा ने यह सीट अपने नाम कर ली थी। ऐसे में इस बार लोकसभा चुनाव में एक बार फिर सपा-बसपा गठबंधन और बीजेपी के बीच मुकाबले की उम्मीद है। फूलपुर लोकसभा सीट से कुर्मी समाज के कई प्रत्याशी जीतकर संसद पहुंचे। इसके अलावा यहां सपा का भी मजबूत जनाधार है। यही वजह है कि 1996 से लेकर 2004 और 2018 के उप-चुनाव में सपा ने जीत दर्ज की। इस बार भाजपा की तरफ से जहां केशरी पटेल चुनाव मैदान में हैं तो कांग्रेस ने अपना दल की कृष्णा पटेल के दामाद पंकज निरंजन को उतारा है। सपा ने अपने मौजूदा सांसद का टिकट काटकर पंधारी यादव पर विश्वास जताया है। बताते हैं कि भाजपा और कांग्रेस की तरफ से कुर्मी उम्मीदवार उतारे जाने की वजह से कांग्रेस ने यादव प्रत्याशी तय किया है। भाजपा-केशरी पटेल। सपा- पंधारी यादव। कांग्रेस- पंकज निरंजन।

2.आजमगढ़ संसदीय सीट (कुल वोटरः17,07,637) 2014 की मोदी लहर से अछूती रहने वाली पूर्वांचल की एकमात्र सीट आजमगढ़ थी। पिछले चुनाव में सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव यहां से चुनाव लड़कर जीते थे तो इस बार सपा मुखिया अखिलेश यादव चुनाव मैदान में हैं। उनके साथ बसपा की भी ताकत है जबकि कांग्रेस ने अखिलेश यादव के खिलाफ प्रत्याशी ही नहीं खड़ा किया है। ऐसे में इस सीट पर सपा और भाजपा में सीधी टक्कर है। भाजपा ने भोजपुरी स्टार दिनेशलाल यादव निरहुआ को प्रत्याशी बनाया है। सत्तर के दशक तक कांग्रेस की सीट रही आजमगढ़ एक बार जो कांग्रेस के हाथ से फिसली तो फिर कांग्रेस कभी वैसा प्रदर्शन नहीं कर सकी। हां, 1984 में जरूर कांग्रेस ने एक बार फिर इस सीट पर कब्जा किया था। सपा और बसपा के एक साथ मुस्लिम यादव बहुल सीट पर आने के बाद यहां की स्थितियां भाजपा के लिए पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण दिख रही हैं। भाजपा- दिनेश लाल निरहुआ। सपा- अखिलेश यादव

 

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here