2019 का चुनाव परिणाम एक्जिट पोल के अनुरूप ही होगा : जेटली

वित्त मंत्री अरूण जेटली ने उम्मीद जतायी कि 2019 का चुनाव परिणाम इस संबंध में आए एक्जिट पोल के अनुरूप ही होगा जिसमें नरेन्द्र मोदी नीत राजग के दोबारा सत्ता में आने का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है । लोकसभा चुनाव 2019 के लिए रविवार शाम को जारी ज्यादातर एक्जिट पोल के मुताबिक एक बार फिर भाजपा नीत राजग बहुमत से केन्द्र में सरकार बनाता दिख रहा है। लगभग सभी एक्जिट पोल में भाजपा नीत गठबंधन को 272 के जादुई आंकड़े को पार करता दिखाया गया है।

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नयी दिल्ली, 20 may : वित्त मंत्री अरूण जेटली ने उम्मीद जतायी कि 2019 का चुनाव परिणाम इस संबंध में आए एक्जिट पोल के अनुरूप ही होगा जिसमें नरेन्द्र मोदी नीत राजग के दोबारा सत्ता में आने का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है । लोकसभा चुनाव 2019 के लिए रविवार शाम को जारी ज्यादातर एक्जिट पोल के मुताबिक एक बार फिर भाजपा नीत राजग बहुमत से केन्द्र में सरकार बनाता दिख रहा है। लगभग सभी एक्जिट पोल में भाजपा नीत गठबंधन को 272 के जादुई आंकड़े को पार करता दिखाया गया है।

जेटली ने अपने ब्लाग ‘एक्जिट पोल का संदेश’ में कहा, ‘‘ हममें से कई एक्जिट पोल की सत्यता और उसके सटीक होने को लेकर तकरार कर सकते हैं । लेकिन वास्तविकता यह है कि विभिन्न एक्जिट पोल में एक समान संदेश है और परिणाम भी मोटे तौर पर इसी संदेश के अनुरूप होंगे । ’’

उन्होंने कहा कि एक्जिट पोल में ईवीएम का कोई योगदान नहीं होता है और ऐसे में अगर आम चुनाव का वास्तविक परिणाम भी अगर एक्जिट पोल के अनुरूप रहता है तब विपक्ष द्वारा उठाये गए फर्जी ईवीएम मुद्दे का भी अस्तित्व नहीं रह जायेगा । भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि अगर एक्जिट पोल 2014 के चुनाव परिणाम की तरह होते हैं तब यह स्पष्ट हो जायेगा कि भारतीय लोकतंत्र काफी परिपक्व हो गया है ।

मतदाता अपनी पसंद चुनने से पहले राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि मानते हैं । जब अच्छे विचार रखने वाले लोग समान विचार के साथ एक ही दिशा में वोट करते हैं तब यह लहर पैदा करता है । कांग्रेस का उल्लेख करते हुए जेटली ने कहा कि गांधी परिवार ग्रैंड ओल्ड पार्टी के लिये बोझ बन गया है। कांग्रेस में प्रथम परिवार अब पूंजी नहीं बल्कि बोझ बन गया है ।

उन्होंने कहा कि मतदाता अब प्रतिद्वन्द्वियों के गठबंधन पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं । जेटली ने कहा कि जाति आधारित गठबंधन अब मान्य नहीं है और अब लोग फर्जी मुद्दे पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं ।

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