‘चिल्लर एजेंट’: मरने के बाद भिखारी के बैग से मिले 3.22 लाख रुपये

पुलिस ने भिखारी की पहचान बाशा के रूप में की है। वह पिछले 12 साल से दरगाह के बाहर भीख मांग रहा है। पुलिस ने बताया कि उन्हें एक शख्स ने फोन करके बताया कि एक बुजुर्ग भिखारी की दरगाह परिसर के बाहर मौत हो गई। सर्कल इंस्पेक्टर अनिल कुमार और सब-इंस्पेक्टर रामकृष्ण रेड्डी ने कहा कि उन्होंने पहले किसी पहचान पत्र के लिए बाशा का कपड़े का बैग खंगाला।

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आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में एक भिखारी के मरने के बाद उसके बैग से 3.22 लाख रुपये निकले। स्थानीय लोगों का कहना है कि वह दुकानदारों को चिल्लर दिया करता था।

विजयवाड़ा
अनंतपुर जिले के गुंटकल में मस्तान वली दरगाह के बाहर पुलिसवालों को जो मिला, उसे देखकर उनके होश उड़ गए। यहां लोगों ने पुलिस को सूचना दी कि एक भिखारी की नींद में ही मौत हो गई है। पुलिस ने वहां पूछकर उसकी पहचान जानने के लिए उसके सामान को खंगाला तो उसमें से ढेर सारा चिल्लर और नोट निकले। बाद में जब इन रुपयों की गिनती की गई तो पता चला कि वह भिखारी अपने पीछे 3,22,676 रुपये छोड़ गया था। 

पुलिस ने भिखारी की पहचान बाशा के रूप में की है। वह पिछले 12 साल से दरगाह के बाहर भीख मांग रहा है। पुलिस ने बताया कि उन्हें एक शख्स ने फोन करके बताया कि एक बुजुर्ग भिखारी की दरगाह परिसर के बाहर मौत हो गई। सर्कल इंस्पेक्टर अनिल कुमार और सब-इंस्पेक्टर रामकृष्ण रेड्डी ने कहा कि उन्होंने पहले किसी पहचान पत्र के लिए बाशा का कपड़े का बैग खंगाला। 

बैग से निकले 3.22 लाख रुपये
उन्हें बैग में पहचान पत्र तो नहीं मिला लेकिन सालों से जमा किए नोट और चिल्लर मिला। पुलिस ने उसके शव को अस्पताल पहुंचा दिया। बाद में बैग के पैसों की गिनती की गई। गिनती में बैग से 3,22,676 रुपये मिले। बाशा ने ये पैसे न कहीं लगाए और न इनका इस्तेमाल किया। स्थानीय लोग कहते हैं कि बाशा दुकानदारों के लिए चिल्लर एजेंट था। उसके पास 500 के नोट के लिए भी छुट्टा होता था। बदले में वह 5 या 1 रुपये ज्यादा लेता था। 

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